दोस्तों आज हम नवरात्री के बारे में बार करने वाले है। अगर आपके मन में Navratri Kyu Manaya Jata Hai ,

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तो आज ये दूर हो जाएगा और आपको नवरात्री से रिलेटेड सभी जानकारी मिल जाएगी।




नवरात्रि हिंदुओं का प्रमुख त्योहार में से एक है जिसे दुर्गा पूजा भी कहते हैं। Navratri का अर्थ है नौ रातें होती है।

इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान देवियो के नौ रूपों की लगातार पूजा की जाती है। और दसवां दिन Dussehra के नाम से भी Famous है।

इस Festival को पूरे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है।

रोशनी का त्योहार दीवाली, दशहरा के बीस दिन बाद मनाया जाता है। 

भारत में Navratra का त्योहार, एक ऐसा त्योहार है जो हमारी महिलाओं के गरिमामय स्थान को दर्शाता है। 

भारत त्यौहारो का देश है और यहां अलग अलग जाती में अलग अलग त्योहार मनाये जाते हैं।

नवरात्रि भी एक ऐसा त्योहार है जो Winter season में पड़ती है।

इस दौरान चारों तरफ भक्ति का माहौल रहता है।

हर जगह देवी के जयकारे सुनायी देते हैं। चूंकि यह नवरात्रि मां दुर्गा से संबंधित पूजा होती है इसलिए इसे बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है।

माता के भक्त नौ दिनों का उपवास रखकर पूरे भक्तिभाव से Navratri मनाते हैं और सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

Navratri के पीछे वैज्ञानिक कारण क्या है। इस आर्टिकल में हम इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

नवरात्रि कब मनायी जाती है – Navratri kab manayi jati hai in Hindi

प्रत्येक वर्ष शरद ऋतु में मनायी जाती है। वैसे तो वर्ष में कुल दो नवरात्रि पड़ती है

लेकिन शरद ऋतु में मनायी जाने वाली नवरात्रि का बहुत ज़्यादा महत्त्व होता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार नवरात्रि अश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी तक मनायी जाती है।

इसे शारदा नवरात्रि, शारदीय नवरात्र, आदिशक्ति दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है।

ग्रिगेरियन कैलेंडर के अनुसार शारदा नवरात्रि प्रत्येक वर्ष सितंबर या अक्टूबर माह में पड़ती है।

जबकि चैत्र नवरात्र मार्च या अप्रैल में मनायी जाती है।

साल में नवरात्रि कितनी बार मनायी जाती है?

नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाने वाला इकलौता उत्सव है-एक नवरात्रि गर्मी की शुरुआत पर चैत्र में और दूसरा शीत की शुरुआत पर आश्विन माह में।

इसलिए पवित्र शक्तियोंकी आराधना करने के लिए यह समय सबसे अच्छा माना जाता है।

प्रकृति में बदलाव के कारण हमारे तन-मन और मस्तिष्क में भी बदलाव आते हैं।

एक बार इसे सत्यऔर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है,

वहीं दूसरी बार इसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

Navratri information in hindi

नवरात्र में देवी माँ के व्रत रखे जाते हैं। स्थान–स्थान पर देवी माँ की मूर्तियाँ बनाकर उनकी विशेष पूजा कि जाती है।

घरों में भी अनेक स्थानों पर कलश स्थापनाकर Navratri Kyu Manaya Jata दुर्गा सप्तशती पाठ आदि होते हैं।

नरीसेमरी में देवी माँ की जोत के लिए श्रृद्धालु आते हैं और पूरे नवरात्र के दिनों में भारी मेला रहता है।

शारदीय नवरात्रआश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक यह व्रत किए जाते हैं।

भगवती के नौ प्रमुख रूप (अवतार) हैं तथा प्रत्येक बार 9-9 दिन ही ये विशिष्टपूजाएँ की जाती हैं।

इस काल को नवरात्र कहा जाता है। वर्ष में दो बार भगवती भवानी की विशेष पूजा कि जाती है।

इनमें एक नवरात्र तो चैत्र शुक्ल प्रतिपदासे नवमी तक होते हैं

और दूसरे श्राद्धपक्ष के दूसरे दिन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से आश्विन शुक्ल नवमी तक।

आश्विन मास के इन नवरात्रों को ‘शारदीय नवरात्र’ कहा जाता है क्योंकि इस समय शरद ऋतु होती है।

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इस व्रत में नौ दिन तक भगवती दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशतीका पाठ तथा एक समय भोजन का व्रत धारण किया जाता है।

प्रतिपदा के दिन प्रात: स्नानादि करके संकल्प करें तथा स्वयं या पण्डित के द्वारा मिट्टी की वेदी बनाकरजौ बोने चाहिए।

उसी पर घट स्थापना करें। फिर घट के ऊपर कुलदेवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन करें तथा ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ कराएँ।

पाठ-पूजन के समय अखण्डदीप जलता रहना चाहिए। वैष्णव लोग राम की मूर्ति स्थापित कर रामायण का पाठ करते हैं।

दुर्गा अष्टमी तथा नवमी को भगवती दुर्गा देवी की पूर्ण आहुति दी जाती है।

नैवेद्य, चना, हलवा, खीर आदि से भोग लगाकर कन्या तथा छोटे बच्चों को भोजन कराना चाहिए।

नवरात्र ही शक्ति पूजा का समय है, इसलिए नवरात्र में इन शक्तियों की पूजा

दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता हैं? Navratri Kyu Manaya Jata Hai

नवरात्रि नौ दिनों का त्यौहार है और इसे पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

हालांकि नवरात्रि मनाने के पीछे दो कहानियों का ज़िक्र किया जाता है।

नवरात्रि को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में भी मनाया जाता है।

देश के उत्तरी और पश्चिमी भागों में मान्यता है कि राम ने रावण को हराकर विजय प्राप्त की थी।

इसी उपलक्ष्य में नवरात्रि मनायी जाती है।

पुराणों के अनुसार रावण जब माता सीता का हरण करके ले गया था तब भगवान राम ने रावण से युद्ध करके उसका वध कर दिया था।

राम और रावण का अंतिम युद्ध दशमी के दिन हुआ था और उसी दिन रावण मारा गया था।

नवरात्रि में नौ दिनों तक रामायण का पाठ किया जाता है और रामलीला का मंचन आयोजित होता है।

दसवें दिन रावण का पुतला जलाकर दशहरा मनाया जाता है।

भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में नवरात्रि उत्सव का मुख्य कारण यह माना जाता है

कि शेर पर सवार होकर महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था और देवताओं की रक्षा कि थी।




इसी के उपलक्ष्य में नवरात्रि मनायी जाती है और आदि शक्ति दुर्गा कि नौ दिनों तक आराधना कि जाती है।

1). पहली कथा के अनुसार

इस पर्व से जुड़ी कथा के अनुसार देवी दुर्गा ने एक भैंस रूपी असुर अर्थात महिषासुर का वध किया था।

पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर के एकाग्र ध्यान से बाध्य होकर देवताओं ने उसे अजय होने का वरदान दे दिया।

उसको वरदान देने के बाद देवताओं को चिंता हुई कि वह अब अपनी शक्ति का ग़लत प्रयोग करेगा।

महिषासुर ने सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, यम, वरुण और अन्य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए और स्वयं स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा।

देवताओं को महिषासुर के प्रकोप से पृथ्वी पर विचरण करना पड़ रहा।

तब महिषासुर के इस दुस्साहस से क्रोधित होकर देवताओं ने देवी दुर्गा कि रचना की। कहा जाता है

कि इन देवताओं के सम्मिलित प्रयास से देवी दुर्गा और बलवान हो गईं थी।

इन नौ दिन देवी-महिषासुर संग्राम हुआ और अन्ततः महिषासुर-वध कर महिषासुर मर्दिनी कहलायीं।

2). दूसरी कथा के अनुसार 

एक कथा के अनुसार लंका युद्ध में ब्रह्माजी ने श्रीराम से रावण-वध के लिए चंडी देवी का पूजन कर देवी को प्रसन्न करने को कहा।

विधि के अनुसार चंडी पूजन और हवन हेतु दुर्लभ 108 नीलकमल की व्यवस्था भी करा दी।

वहीं दूसरी ओर रावण ने भी अमरत्व प्राप्त करने के लिए चंडी पाठ प्रारंभ कर दिया।

इधर रावण ने मायावी तरीक़े से पूजास्थल पर हवन सामग्री में से एक नीलकमल ग़ायब करा दिया जिससे श्रीराम की पूजा बाधित हो जाए।

श्रीराम का संकल्प टूटता नज़र आया। सभी में इस बात का भय व्याप्त हो गया कि कहीं माँ दुर्गा कुपित न हो जाएँ।

तभी श्रीराम को याद आया कि उन्हें Navratri Kyu Manaya Jata …कमल-नयन नवकंज लोचन… भी कहा जाता है।

तो क्यों न एक नेत्र Navratri Kyu Manaya Jata को वह माँ की पूजा में समर्पित कर दें।

श्रीराम ने जैसे ही तूणीर से अपने नेत्र को निकालना चाहा तभी माँ दुर्गा प्रकट हुईं

और कहा कि वह पूजा से प्रसन्न हुईं और उन्होंने विजयश्री का आशीर्वाद दिया।

दूसरी तरफ़ रावण की पूजा के समय हनुमान जी ब्राह्मण बालक का रूप धरकर वहाँ पहुँच गए

और पूजा कर रहे ब्राह्मणों से एक श्लोक …जयादेवी.।भूर्तिहरिणी… में हरिणी के स्थान पर करिणी उच्चारित करा दिया।

हरिणी का अर्थ होता है भक्त की पीड़ा हरने वाली और करिणी का अर्थ होता है पीड़ा देने वाली।

इससे माँ दुर्गा रावण से नाराज़ हो गईं और रावण को श्राप दे दिया। रावण का सर्वनाश हो गया।

नवरात्रि में होती है इन नौ देवियों की पूजा

  1. श्री शैलपुत्री- इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
  2. श्री ब्रह्मचारिणी- इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
  3. श्री चंद्रघरा- इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।
  4. श्री कूष्माडा- इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
  5. श्री स्कंदमाता- इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
  6. श्री कात्यायनी- इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
  7. श्री कालरात्रि- इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
  8. श्री महागौरी- इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।
  9. श्री सिद्धिदात्री- इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।

नवरात्रि के पीछे वैज्ञानिक कारण

नवरात्रि के पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि जब दो ऋतुओं का समागम होता है।

तो दोनों नवरात्रि इसी ऋतु के बीच पड़ती है। इसे ऋतु संधिकाल कहा जाता है और सेहत के लिए इसका बहुत महत्त्व है।

पुराणों के अनुसार संधिकाल में वात, कफ और पित्त घट जाता है और व्यक्ति की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है।

जिसके कारण तमाम Navratri Kyu Manaya Jata तरह की बीमारियाँ शरीर में घर करने लगती हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाने के लिए नौ दिनों की नवरात्रि का व्रत रखकर माता कि भक्ति करना फलदायी माना जाता है।

इस दौरान शरीर का शुद्धिकरण भी हो जाता है।

इसके अलावा एक और वैज्ञानिक तर्क यह दिया जाता है कि नवरात्रि की नौ रातें बहुत शुभ होती हैं।

और इस दौरान प्रकृति के सभी अवरोध ख़त्म हो जाते हैं।

यही कारण है कि संधिकाल में नवरात्रि मनायी जाती है।

हिंदू धर्म का बहुत पवित्र और धार्मिक पर्व होने के कारण नवरात्रि में लोग पूरे श्रद्धाभाव से एकजुट होकर इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

नवरात्रि हमारी संस्कृति का भी परिचायक है और इसके वैज्ञानिक कारण भी काफ़ी महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं।

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तो दोस्तों आज हम इस ब्लॉग की मदद से दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता हैं? Navratri Kyu Manaya Jata Hai के बारे में जाना है। इसमें आपको किसी भी तरह की कोई Doubt या परेशानी हो तो आप बेझिझक हमसे Comment के जरिये पूछ सकते है , अगर आपके लिए ये Article Helpful रहा तो आप इसे शेयर जरूर करे ताकि आपके जैसा बहुत लोग है जिसे नहीं पता है। दोस्तों आपकी एक शेयर से किसी की Help हो जाएगी। अगर अभी तक हमारे Facebook Page को लाइक नहीं किया है तो लाइक जरूर करें।

“धन्यवाद्”

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